Wednesday, June 29, 2011

मैं भी तेरे जैसा हूँ

Opening Line from a Ghulam Ali ghazal

अपनी धुन में रहता हूँ, मैं भी तेरे जैसा हूँ ।


तू मुझ सा हो गया, और मैं मेरे जैसा हूँ ।
रह रह कर इन स्याह रातों में
रह-रह नूर से डरता हूँ ।
नुमायाँ और बयां का फ़र्क मिट गया,
जैसा हूँ, मैं कहता हूँ ।
ज़माना तो छोड़ दूं, पर ज़माना छूटे कैसे,
कोई महफ़िल ये नहीं, के कह दूं - 'अच्छा चलता हूँ '।
इस दुनिया को इश्क़ की पहचान, आशिक़ों से बेहतर है
बहुत क़रीब से दुनिया देखी है, तो कहता हूँ ।
बेशक्ली, बेख़याली, बेख़ुदी,
मैं बस मेरे जैसा हूँ ।
अपनी धुन में रहता हूँ, मैं भी तेरे जैसा हूँ
तू मुझसा हो गया, और मैं मेरे जैसा हूँ ।

1 comment:

Garima said...

beautiful "mirror" image! love the last two lines :)